Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 136 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 136

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 136
Shloka
नारुंतुदः स्यादार्तोऽपि न परद्रोहकर्मधीः। ययास्योद्विजते वाचा नालोक्यां तां उदीरयेत्॥

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1 Bhashyas
Subject
दूसरों से द्रोह आदि का निषेध
Meaning
मनुष्य (आर्तः अपि) स्वयं दुःखी होता हुआ भी (अरुंतुद: न स्यात्) किसी दूसरे को कष्ट न पहुंचावे (न परद्रोहकर्मधीः) न दूसरे के प्रति ईर्ष्या या बुरा करने की भावना मन में लाये (अस्य यथा वाचा उद्विजते) इस मनुष्य के जिस वचन से कोई दुःखित हो (ताम् अलोक्यां न उदीरयेत्) उस ऐसी लोक में अप्रशंसनीय वारणी को न बोले॥१३६॥