Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 135 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 135

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 135
Shloka
यस्य वाङ्गनसी शुद्धे सम्यग्गुप्ते च सर्वदा। स वै सर्वं अवाप्नोति वेदान्तोपगतं फलम्॥

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1 Bhashyas
Subject
वेदों के फल की प्राप्ति का उपाय
Meaning
(यस्य वाङ्मनसी) जिस मनुष्य के वारणी और मन (शुद्धे च सम्यग्गुप्ते सर्वदा) शुद्ध तथा सुरक्षित सदा रहते हैं (सः वै) वही (सर्वं वेदान्तोपगतं फलं प्राप्नोति) सब वेदान्त अर्थात् सब वेदों के सिद्धान्तरूप फल को प्राप्त होता है ॥१३५॥