Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 134 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 134

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 134
Shloka
अहिंसयैव भूतानां कार्यं श्रेयोऽनुशासनम्। वाक्चैव मधुरा श्लक्ष्णा प्रयोज्या धर्मं इच्छता॥

Bhashya

Subject
गुरु-शिष्यों को व्यवहार
Meaning
(अहिंसया एव भूतानाम्) (विद्वान और विद्यार्थियों को योग्य है कि) वैरबुद्धि छोड़के सब मनुष्यों के (श्रेय: अनुशासनं कार्यम्) कल्याण के मार्ग का उपदेश करें (च) और (मधुरा श्लक्ष्णा वाक् प्रयोज्या) उपदेष्टा मधुर, सुशीलतायुक्त वाणी बोलें (धर्मम् इच्छता) जो धर्म की उन्नति चाहे वह सदा सत्य में चले और सत्य ही का उपदेश करे॥१३४॥