Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 132 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 132

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/132
Adhyay 2 Shloka 132
Shloka
यथा काष्ठमयो हस्ती यथा चर्ममयो मृगः। यश्च विप्रोऽनधीयानस्त्रयस्ते नाम बिभ्रति॥

Bhashya

Subject
मूर्ख की निन्दा
Meaning
(यथा काष्ठमयः हस्ती) जैसे काठ का कठपुतला हाथी, वा (यथाचर्ममयः मृगः) जैसे चमड़े का बनाया हुआ मृग हो (यः च अनधीयानः विप्रः) वैसे बिना पढ़ा हुआ विप्र अर्थात् ब्राह्मरण वा बुद्धिमान् जन होता है (ते त्रयः नाम बिभ्रति). उक्त वे हाथी, मृग और वित्र तीनों नाममात्र धारण करते हैं॥१३२॥