Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 131 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 131

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 131
Shloka
न तेन वृद्धो भवति येनास्य पलितं शिरः। यो वै युवाप्यधीयानस्तं देवाः स्थविरं विदुः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
अवस्था की अपेक्षा ज्ञान से
Meaning
(तेन वृद्धः न भवति) उस कारण से वृद्ध नहीं होता (येन अस्य शिरः पलितम्) कि जिससे इसका शिर भूल जाये, केश पक जावें (यः वै युवा अपि अधीयान:) किन्तु जो जवान भी पढ़ा हुआ विद्वान् है (तं देवाः स्थविरं विदुः) उसको विद्वानों ने वृद्ध जाना और माना है ॥१३१॥