Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 129 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 129

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 129
Shloka
न हायनैर्न पलितैर्न वित्तेन न बन्धुभिः। ऋषयश्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान्॥

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1 Bhashyas
Subject
अवस्था आदि की अपेक्षा वेदज्ञान की श्रेष्ठता
Meaning
(हायनैः) अधिक वर्षों के बीतने (पलितः) श्वेत बाल के होने (वित्तेन) अधिक धन से (बन्धुभिः) बड़े कुटुम्ब के होने से (न) वृद्ध नहीं होता (ऋषय: धर्मं चक्रिरे) किन्तु ऋषि-महात्माओं का यही नियम है कि (नः यो अनूचानः स महान्) जो हमारे बीच में विद्या विज्ञान में अधिक है, वही बृद्ध पुरुष कहाता है ॥१२९॥