Adhyay 2
Shloka 129
Shloka
न हायनैर्न पलितैर्न वित्तेन न बन्धुभिः। ऋषयश्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान्॥
Shloka 129 Chapter Two
Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय
