Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 128 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 128

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 128
Shloka
अज्ञो भवति वै बालः पिता भवति मन्त्रदः। अज्ञं हि बालं इत्याहुः पितेत्येव तु मन्त्रदम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अज्ञः वै बालः भवति) चाहे सौ वर्ष का भी हो परन्तु जो विद्या विज्ञान से रहित है वह बालक औौर (मन्त्रदः पिता भवति) जो विद्या विज्ञान का दाता है उस बालक को भी वृद्ध [ = पिता] मानना चाहिए हि क्योंकि सब शास्त्र, प्राप्त विद्वान् (अज्ञं बालम् इति) अज्ञानी को बालक (मन्त्रदं तु पिता इत्येव आहुः) और ज्ञानी को पिता कहते हैं ॥१२८॥