Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 127 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 127

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 127
Shloka
ते तं अर्थं अपृच्छन्त देवानागतमन्यवः। देवाश्चैतान्समेत्योचुर्न्याय्यं वः शिशुरुक्तवान्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(आगतमन्यवः ते) [ उक्त संबोधन को सुनकर ] गुस्से में आये हुए उन पितरों ने (तम् अर्थं देवान् अपृच्छन्त) उस 'पुत्र' सम्बोधन के अर्थ अथवा औचित्य के विषय में देवताओं-बड़े विद्वानों से पूछा (च) और तब (देवाः समेत्य एतान् ऊचुः) सब विद्वानों ने एकमत होकर इनसे कहा कि (शिशुः वः न्याय्यम उक्तवान्) बालक आङ्गिरस ने तुम्हारे लिए 'पुत्र' शब्द का सम्बोधन ठीक ही किया है॥१२७ ।।