Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 126 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 126

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 126
Shloka
अध्यापयां आस पितॄन्शिशुराङ्गिरसः कविः। पुत्रका इति होवाच ज्ञानेन परिगृह्य तान्॥

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Subject
उक्त विषय में ग्राङ्गिरस का दृष्टान्त
Meaning
[इस प्रसंग में एक इतिवृत्त भी है] (शिशु: आङ्गिरसः कविः) आङ्गिरस नामक विद्वान् बालक ने (पितॄन्) अपने पिता के समान चाचा आदि पितरों को (अध्यापयामास) पढ़ाया (ज्ञानेन परिगृह्य) ज्ञान देने के कारण (तानु 'पुत्रकाः' इति ह उवाच) उनको 'हे पुत्रो' इस शब्द से सम्बोधित किया ||१२६॥