Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 123 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 123

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 123
Shloka
आचार्यस्त्वस्य यां जातिं विधिवद्वेदपारगः। उत्पादयति सावित्र्या सा सत्या साजरामरा॥

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Meaning
(वेदपारगः आचार्य:) वेद में पारंगत आचार्य (विधिवत्) विधिपूर्वक (गायत्र्या) गायत्री संस्कार - उपनयनसंस्कार से (अस्य) इसकी (यां जातिम् उत्पादयति) जाति = अर्थात् वर्ण या आत्मिक स्वरूप को बनाता है (सा सत्या-सा अजरा-अमरा) वही इसकी वास्तविक जाति = वर्ण है, वही जाति [ शरीरजन्म की अपेक्षा ] क्षीरण, न होने वाली और स्थिर रहने वाली है अर्थात् शिक्षा प्रदान करके निर्धारित किये गये वर्ण के संस्कार परजन्मों तक रहते हैं । १२३ ।।