Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 121 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 121

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 121
Shloka
उत्पादकब्रह्मदात्रोर्गरीयान्ब्रह्मदः पिता। ब्रह्मजन्म हि विप्रस्य प्रेत्य चेह च शाश्वतम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(उत्पादक-ब्रह्मदात्रो:) उत्पन्न करने वाले पिता और विद्या या वेदज्ञान देनेवाले पिता [ आचार्य] में (ब्रह्मदः पिता गरीयान्) वेदज्ञान देनेवाला पिता ही अधिक बड़ा और माननीय है (हि) क्योंकि (विप्रस्य) द्विज का (ब्रह्मजन्म) [ शरीर जन्म की अपेक्षा] ब्रह्मजन्म [–उपनयन में दीक्षित करके वेदाध्ययन कराके वर्ण निर्धारित करना] ही (इह च प्रेत्य शाश्वतम्) इस जन्म औौर परजन्म में स्थिर रहने वाला है अर्थात् शरीर तो इस जन्म के साथ ही नष्ट हो जाता है किन्तु विद्या के संस्कार परजन्मों तक साथ रहते हैं ॥१२१॥