Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 119 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 119

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 119
Shloka
य आवृणोत्यवितथं ब्रह्मणा श्रवणावुभौ। स माता स पिता ज्ञेयस्तं न द्रुह्येत्कदा चन॥

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1 Bhashyas
Subject
अध्यापक या आचार्य की महत्ता
Meaning
(य: ब्रह्मणा) जो गुरु या आचार्य वेदज्ञान के द्वारा (उभौ श्रवणौ अवितथम् आवृणोति) दोनों कानों को भलीभांति परिपूर्ण करता है [ सुनातापढ़ाता है] (सः माता सः पिता ज्ञेयः) उसे माता, पिता समझना चाहिए (तं कदाचन न द्रुह्यत्) और उससे कभी द्रोह [ – ईर्ष्या अपमान] न करे॥११९॥