Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 118 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 118

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 118
Shloka
अग्न्याधेयं पाकयज्ञानग्निष्टोमादिकान्मखान्। यः करोति वृतो यस्य स तस्य र्त्विगिहोच्यते॥

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Subject
ऋत्विक् का लक्षण
Meaning
(यः वृतः) जो ब्राह्मरण किसी के द्वारा वरण किये जाने पर (तस्य) उस वरण करने वाले के (अग्न्याधेयम्) अग्निहोत्र (पाकयज्ञान्) अष्टमी, अमावस्या, पूर्णिमा आदि विशेष उपलक्ष्यों पर किये जाने वाले यज्ञों को (अग्निष्टोमादि कान् मखान्) और अग्निष्टोम आदि बड़े यज्ञों को (करोति) कराता है (स: तस्य ऋत्विक् उच्यते) वह उस वरण करने वाले का 'ऋत्विक' कहलाता है ॥११८॥