Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 117 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 117

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 117
Shloka
निषेकादीनि कर्माणि यः करोति यथाविधि। संभावयति चान्नेन स विप्रो गुरुरुच्यते॥

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1 Bhashyas
Subject
पितागुरु का लक्षण
Meaning
(यः यथाविधि) जो विधि अनुसार (निषेकादीनि कर्मारिण करोति) गर्भाधान आदि संस्कारों को करता है (च) तथा (अन्नेन संभावयति) अन्न आदि भोज्य पदार्थों द्वारा बालक का पालन-पोषण करता है (स विप्रः) वह विद्वान् द्विज (गुरु: उच्यते) गुरु कहलाता है ॥११७॥