Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 115 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 115

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 115
Shloka
उपनीय तु यः शिष्यं वेदं अध्यापयेद्द्विजः। सकल्पं सरहस्यं च तं आचार्यं प्रचक्षते॥

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Subject
प्राचार्य का लक्षण
Meaning
(यः उपनीय तु) जो यज्ञोपवीत कराके (सकल्पं च सरहस्यम्) कल्पसूत्र और वेदान्तसहित (शिष्यं वेदम् अध्यापयेत्) शिष्य को वेद पढ़ावे (तम् आचार्यं प्रचक्षते) उसको प्राचार्य कहते हैं ॥११५॥2.116 उपाध्याय का लक्षण (यः) जो (वृत्यर्थम्) जीविका के लिए (वेदस्य एकदेशम्) वेद के किसी एक भाग या अंश को (अपि वा पुनः वेदांगानि) या फिर वेदांगों [शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्दशास्त्र और ज्योतिष ] को (अध्यापयति) पढ़ाता है (सः उपाध्याय: उच्यते) वह 'उपाध्याय' कहलाता है ।। ११६ ।।