Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 114 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 114

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 114
Shloka
तेषां तु समावेतानां मान्यौ स्नातकपार्थिवौ। राजस्नातकयोश्चैव स्नातको नृपमानभाक्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तेषाम् तु) उन [२ | ११३] सब के (समवेतानाम्) एकत्रित होने पर (स्नातक पार्थिवौ मान्यौ) स्नातक और राजा सबके सम्मान के योग्य हैं (च) और (राजस्नातकयोः एव) राजा तथा स्नातक में भी (स्नातकः) स्नातक ही (नृपमानभाक्) राजा के द्वारा सम्मान पाने योग्य है अर्थात् स्नातक - विद्वान् सबसे अधिक सम्मान का पात्र है॥११४॥