Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 112 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 112

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 112
Shloka
पञ्चानां त्रिषु वर्णेषु भूयांसि गुणवन्ति च। यत्र स्युः सोऽत्र मानार्हः शूद्रोऽपि दशमीं गतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(त्रिषु वर्णेषु) तीनों वर्गों में अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों में परस्पर (पञ्चानां यत्र भूयांसि गुरगवन्ति स्युः) उक्त [२ | १११] पांच गुणों में से अधिक गुरण जिसमें हों (अत्र सः मानार्हः) समाज में वह कम गुणवालों के द्वारा सम्मान करने योग्य है (दशमीं गतः शूद्रः अपि) तथा दशमी अवस्था अर्थात् नब्बे वर्ष से अधिक आयुवाला शुद्र भी सब के द्वारा सम्मान देने योग्य है॥११२॥