Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 104 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 104

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 104
Shloka
परपत्नी तु या स्त्री स्यादसंबन्धा च योनितः। तां ब्रूयाद्भवतीत्येवं सुभगे भगिनीति च॥

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1 Bhashyas
Subject
परस्त्री के नामोच्चारण का निषेध
Meaning
(या परपत्नी च योनितः असम्बन्धा स्त्री स्यात्) जो कोई दूसरे की पत्नी और योनि से सम्बन्ध न रखने वाली स्त्री अर्थात् बहन आदि न हो तो (ताम्) उसे ('भवति' 'सुभगे' 'भगिनी' इति एवं ब्रू यात्) 'भवति !' [=आप] 'सुभगे!' [= सौभाग्यवति !] 'भगिनी !' [ = बहन] इस प्रकार के शब्दों से सम्बोधित करे ॥१०४॥