Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 102 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 102

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/102
Adhyay 2 Shloka 102
Shloka
ब्राह्मणं कुशलं पृच्छेत्क्षत्रबन्धुं अनामयम्। वैश्यं क्षेमं समागम्य शूद्रं आरोग्यं एव च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वर्णानुसार कुशल प्रश्नविधि
Meaning
[ मिलने पर, नमस्कार के बाद] (ब्राह्मणं कुशलं पृच्छेत्) ब्राह्मण से कुशलता – प्रसन्नता एवं वेदाध्ययन आदि की निर्विघ्नता (क्षत्रबन्धुम् अनामयम्) क्षत्रिय से बल आदि की दृष्टि से स्वास्थ के विषय में (वैश्यं क्षेमम्) वैश्य से क्षेमधन आदि की सुरक्षा और आनन्द के विषय में (च) और (शूद्रम् आरोग्यम् एव) शूद्र के स्वस्थता के विषय में (पृच्छेत्) पूछे । अभिप्राय यह है कि वर्णानुसार उनके मुख्य उद्देश्यसाधक व्यवहारों की निर्विघ्नता के विषय में प्रधानता से पूछे ॥१०२॥