Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 101 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 101

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 101
Shloka
यो न वेत्त्यभिवादस्य विप्रः प्रत्यभिवादनम्। नाभिवाद्यः स विदुषा यथा शूद्रस्तथैव सः॥

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Meaning
(यः विप्रः) जो द्विज (अभिवादस्य प्रत्यभिवादनम्) अभिवादन करने के उत्तर में अभिवादन करना नहीं न जानता अर्थात् नहीं करता (विदुषा सः न अभिवाद्यः) बुद्धिमान् आदमी को उसे नमस्कार नहीं करना चाहिए,. क्योंकि (सः यथा शुद्रः तथा एव) वह शूद्र के समान है ॥१०१॥