Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 100 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 100

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 100
Shloka
आयुष्मान्भव सौम्येति वाच्यो विप्रोऽभिवादने। अकारश्चास्य नाम्नोऽन्ते वाच्यः पूर्वाक्षरः प्लुतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अभिवादने) अभिवादन का उत्तर देते समय (विप्रः) द्विज को (सौम्य 'आयुष्मान् भव' इति वाच्यः) 'हे सौम्य ! आयुष्मान् हो' ऐसा कहना चाहिए (च) और (अस्य नाम्नः अन्ते प्रकार: पूर्वाक्षरः प्लुतः वाच्यः) नमस्कार करने वाले के नाम के अन्तिम प्रकार आदि स्वर को पहले अक्षर सहित प्लुत की ध्वनि [तीन मात्राओं के समय में ] में उच्चारण करे । जैसे— 'देवदत्त' नाम में अन्तिम स्वर प्रकार है, जो 'तू' में मिला हुआ है। इस प्रकार 'त्' सहित प्रकार को अर्थात् अन्तिम 'त' को ही प्लुत बोले । उदाहरण है- "आयुष्मान् भव सौम्य देवदत्त: ३" अथवा "आयुष्मान् भव सौम्य देवदत्त: ३"॥१००॥