Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 1 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 1

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 1
Shloka
वैदिकैः कर्मभिः पुण्यैर्निषेकादिर्द्विजन्मनाम्। कार्यः शरीरसंस्कारः पावनः प्रेत्य चेह च॥

Bhashya

Subject
संस्कारों का विधान
Meaning
(१) इसी से सब मनुष्यों को उचित है कि (वैदिकः पुण्यैः कर्मभिः) वेदोक्त पुण्यरूप कर्मों से (द्विजन्मनाम्) ब्राह्मरण, क्षत्रिय, वैश्य अपने सन्तानों का (निषेकादिः शरीरसंस्कारः कार्य:) निषेकादि [ = गर्भाधान आदि] संस्कार करें, जो (इह च प्रेत्य पावनः) इस जन्म वा परजन्म में पवित्र करने वाला है॥१॥=