Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 98 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 98

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 98
Shloka
शब्दः स्पर्शश्च रूपं च रसो गन्धश्च पञ्चमः। वेदादेव प्रसूयन्ते प्रसूतिर्गुणकर्मतः॥

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Meaning
(शब्द: स्पर्श: रूपं रसः पञ्चमः गन्धः) शब्द, स्पर्श, रूप, रस और पञ्चम गन्ध, ये (प्रसूति - गुरण-कर्मतः) उत्पत्ति, गुण और कार्य ज्ञान रूप से (वेदात् + एव प्रसूयन्ते) वेदों से ही प्रसिद्ध = विज्ञात होते हैं अर्थात् इन तत्त्वशक्तियों का उत्पत्तिज्ञान, इनके गुणों का ज्ञान, इनकी उपयोगिता का ज्ञान वेदों से प्राप्त होता है॥९८॥