Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 94 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 94

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 94
Shloka
पितृदेवमनुष्याणां वेदश्चक्षुः सनातनम्। अशक्यं चाप्रमेयं च वेदशास्त्रं इति स्थितिः॥

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1 Bhashyas
Subject
वेदाभ्यास का वर्णन
Meaning
(पितृ-देव-मनुष्याणाम्) पितर=पालक राजा आदि [द्रष्टव्य १२ | १००] विद्वान् और अन्य मनुष्यों का (वेदः सनातनं चक्षुः) वेद सनातन नेत्र = मार्गप्रदर्शक है, (च) और वह (अशक्यम्) अशक्य अर्थात् जिसे कोई पुरुष नहीं बना सकता इस प्रकार अपौरुषेय है, (च) तथा (अप्रमेयम्) अनन्त सत्य विद्याओं से युक्त है, (इति स्थितिः) ऐसी निश्चित मान्यता है ॥९४॥