Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 93 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 93

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/93
Adhyay 12 Shloka 93
Shloka
एतद्धि जन्मसाफल्यं ब्राह्मणस्य विशेषतः। प्राप्यैतत्कृतकृत्यो हि द्विजो भवति नान्यथा॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(एतत् हि) ये [१२ | १२] तीनों कर्म द्विजों के, (विशेषतः ब्राह्मणस्य जन्मसाफल्यम्) विशेष रूप से ब्राह्मरण के जन्म को सफल बनाने वाले हैं। (द्विजः) द्विज व्यक्ति (एतत् प्राप्य हि कृतकृत्यः भवति) इनका पालन करके ही कर्त्तव्यों की पूर्णता प्राप्त करता है, (अन्यथा न) इनके बिना नहीं॥९३॥