Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 92 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 92

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 92
Shloka
यथोक्तान्यपि कर्माणि परिहाय द्विजोत्तमः। आत्मज्ञाने शमे च स्याद्वेदाभ्यासे च यत्नवान्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
श्रात्मज्ञान, इन्द्रियसंयम का कथन
Meaning
(द्विजोत्तमः) श्रेष्ठ द्विज (यथोक्तानि+अपि कर्माणि परिहाय) उसके लिए विहित यज्ञ आदि कर्मों को [ संन्यासी अवस्था में] छोड़कर [६ । ३४, ४३] भी (आत्मज्ञाने शमे च वेदाभ्यासे यत्नवान् स्यात्) परमात्म-ज्ञान, इन्द्रियसंयम [२ । ६८-७५] और वेदाभ्यास में प्रयत्नशील अवश्य रहे अर्थात् इनको किसी भो अवस्था में न छोड़े॥९२॥