Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 9 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 9

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/9
Adhyay 12 Shloka 9
Shloka
शरीरजैः कर्मदोषैर्याति स्थावरतां नरः। वाचिकैः पक्षिमृगतां मानसैरन्त्यजातिताम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(नरः) जो नर (शरीरजैः कर्मदोषैः स्थावरतां याति) शरीर से चोरी, परस्त्रीगमन, श्रेष्ठों को मारने आदि दुष्ट कर्म करता है, उसको वृक्ष आदि स्थावर का जन्म, (वाचिकैः पक्षिमृगताम्) वाणी से किये पापकर्मों से पक्षी और मृग आदि, तथा (मानसैः अन्त्यजातिताम्) मन से किये दुष्टकर्मों से चंडाल आदि का शरीर मिलता है ॥९॥ (स० प्र० नवम समुल्लास)