Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 83 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 83

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/83
Adhyay 12 Shloka 83
Shloka
वेदाभ्यासस्तपो ज्ञानं इन्द्रियाणां च संयमः। अहिंसा गुरुसेवा च निःश्रेयसकरं परम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(वेदाभ्यासः, तपः, ज्ञानम्, इन्द्रियाणां संयमः, धर्मक्रिया, च ग्रात्मचिन्ता) वेदों का अभ्यास [१२ | १४-१०३], तप = व्रतसाधना [१२ | १०४], ज्ञान == सत्यविद्याओं की प्राप्ति [१२ | १०४], इन्द्रियसंयम [१२ | ६२], धर्मक्रियाः धर्मपालन एवं यज्ञ आदि धार्मिक क्रियाओं का अनुष्ठान और आत्मचिन्ता = परमात्मा का ज्ञान एवं ध्यान, ये छः (निःश्रेयसकरं परम्) मोक्ष-प्रदान करने वाले सर्वोत्तम कर्म हैं॥८३॥