Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 81 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 81

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 81
Shloka
यादृशेन तु भावेन यद्यत्कर्म निषेवते। तादृशेन शरीरेण तत्तत्फलं उपाश्नुते॥

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1 Bhashyas
Meaning
मनुष्य (यादृशेन तु भावेन) जैसी अच्छी या बुरी भावना से (यत्-यत् कर्म निषेवते) जैसा अच्छा या बुरा कर्म करता है, (तादृशेन शरीरेण) वैसेवैसे ही शरीर पाकर (तत् तत् फलम + उपाश्नुते) उन कर्मों के फलों को भोगता है॥८१॥