Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 8 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 8

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 8
Shloka
मानसं मनसैवायं उपभुङ्क्ते शुभाशुभम्। वाचा वाचा कृतं कर्म कायेनैव च कायिकम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अयम्) यह जीव (मानसं शुभ + अशुभं कर्म मनसा+एव) मन से जिस शुभ वा अशुभ कर्म को करता है उसको मन, (वाचाकृतं वाचा) वारगी से किये को वारणी, (च कायिकं कायेन+एव) और शरीर से किये को शरीर से (उपभुङ्क्ते) सुख-दुःख को भोगता है ॥८॥ (स० प्र० नवम समु०)