Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 6 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 6

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 6
Shloka
पारुष्यं अनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः। असंबद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुर्विधम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वाङ्मयं चतुर्विधं स्यात्) वाचिक अधमं चार हैं- (पारुष्यम्) पारुष्य अर्थात् कठोरभाषण । सव समय, सव ठौर मृदु भाषण करना यह मनुष्यों को उचित है । किसी अन्धे मनुष्य को 'ग्रो अंधे' ऐसा कहकर पुकारना निस्सन्देह सत्य है, परन्तु कठोर भाषण होने के कारण अधर्म है । (अनृतं च + एव) अनृतभाषण अर्थात् झूठ बोलना, (पैशुन्यं च+अपि) पैशुन्य अर्थात् चुगली करना, (असम्बद्ध प्रलाप:) सम्बद्धप्रलाप अर्थात् जान बूझकर [लांछन या बुराई बनाकर] बात को उड़ाना॥६॥(उपदेशमञ्जरी ३४)