Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 51 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 51

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 51
Shloka
एष सर्वः समुद्दिष्टस्त्रिप्रकारस्य कर्मणः। त्रिविधस्त्रिविधः कृत्स्नः संसारः सार्वभौतिकः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(त्रिप्रकारस्य कर्मण:) मन, वचन, शरीर के भेद से तीन प्रकार के कर्मों का (त्रिविधः) सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण नामक तीन प्रकार का फल, तथा (त्रिविध:) फिर उनकी उत्तम, मध्यम, अधम भेद से तीन-तीन गतियों वाले (सार्वभौतिकः कृत्स्नः संसार:) सर्वभूतयुक्त सम्पूर्ण संसार की उत्पत्ति का (एष: सवः समुद्दिष्टः) यह पूर्ण वर्णन किया॥५१॥(स० प्र० नवम समु०)