Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 50 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 50

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 50
Shloka
ब्रह्मा विश्वसृजो धर्मो महानव्यक्तं एव च। उत्तमां सात्त्विकीं एतां गतिं आहुर्मनीषिणः॥

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Meaning
(उत्तमां सात्त्विकी गतिम्) जो उत्तम सत्त्वगुणयुक्त हो के उत्तम कर्म करते हैं वे (ब्रह्मा) ब्रह्मा = सब वेदों का वेत्ता, (विश्वसृज:) विश्वसृज = सब सृष्टिक्रम विद्या को जानकर विविध विमानादि यानों को बनाने हारे, (धर्म:) धार्मिक, (महान् च अव्यक्तम् + एव) सर्वोत्तम वुद्धियुक्त और अव्यक्त के जन्म और प्रकृतिवशित्व सिद्धि को प्राप्त होते हैं॥५०॥(स० प्र० नवमसमु०)