Adhyay 12
Shloka 50
Shloka
ब्रह्मा विश्वसृजो धर्मो महानव्यक्तं एव च। उत्तमां सात्त्विकीं एतां गतिं आहुर्मनीषिणः॥
Shloka 50 Chapter Twelve
Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन