Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 5 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 5

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 5
Shloka
परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसानिष्टचिन्तनम्। वितथाभिनिवेशश्च त्रिविधं कर्म मानसम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(त्रिविधं मानसं कर्म) मानसिक कर्मों में से तीन मुख्य अधर्म हैं (परद्रव्येषु + अभिध्यानम्) परद्रव्यहरण अथवा चोरी [का विचार] (मनसा + अनिष्टचिन्तनम्) लोगों का बुरा चिन्तन करना, मन में द्वेष करना, ईर्ष्या करना, (वितथ + अभिनिवेश:) वितथाभिनिवेश अर्थात् मिथ्या निश्चय करना॥५॥