Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 49 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 49

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 49
Shloka
यज्वान ऋषयो देवा वेदा ज्योतींषि वत्सराः। पितरश्चैव साध्याश्च द्वितीया सात्त्विकी गतिः॥

Bhashya

Meaning
(द्वितीया सात्त्विकी गतिः) जो मध्यम सत्त्वगुणयुक्त होकर कर्म करते हैं वे जीव (यज्वानः) यज्ञकर्ता, (ऋषयः देवाः) वेदार्थवित् विद्वान्, (वेदाः ज्योतींषि वत्सरा:) वेद, विद्युत् आदि, और कालविद्या के ज्ञाता, (पितरः) रक्षक, ज्ञानी (च) और (साध्याः) साध्य = कार्यसिद्धि के लिए सेवन करने योग्य अध्यापक का जन्म पाते हैं॥४९॥(स० प्र० नवमसमु०)