Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 48 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 48

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 48
Shloka
तापसा यतयो विप्रा ये च वैमानिका गणाः। नक्षत्राणि च दैत्याश्च प्रथमा सात्त्विकी गतिः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तापसाः) जो तपस्वी, (यतयः) यति, संन्यासी, (विप्राः) वेदपाठी, (वैमानिका गणाः) विमान के चलाने वाले, (नक्षत्राणि) ज्योतिषी, (च) और (दैत्याः) दैत्य अर्थात् देहपोषक मनुष्य होते हैं उनको (प्रथमा सात्त्विकी गतिः) प्रथम सत्त्वगुरण के कर्म का फल जानो॥४८॥(स० प्र० नवम समु०)