Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 47 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 47

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 47
Shloka
गन्धर्वा गुह्यका यक्षा विबुधानुचराश्च ये। तथैवाप्सरसः सर्वा राजसीषूत्तमा गतिः॥

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Meaning
(राजसीषु उत्तमा गतिः) जो उत्तम रजोगुणी हैं वे (गंधर्वाः) गंधर्व = गाने वाले, (गुह्यकाः) गुह्यक = वादित्र बजाने वाले, (यक्षाः) यक्ष = धनाढ्य, (विबुधा-अनुचरा:) विद्वानों के सेवक, (तथा + एव सर्वा: अप्सरस:) और अप्सरा अर्थात् जो उत्तम रूप वाली स्त्री का जन्म पाते हैं॥४७॥(स० प्र० नवम समु०)