Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 43 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 43

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 43
Shloka
हस्तिनश्च तुरङ्गाश्च शूद्रा म्लेच्छाश्च गर्हिताः। सिंहा व्याघ्रा वराहाश्च मध्यमा तामसी गतिः॥

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Meaning
(मव्यमा तामसी गतिः) जो मध्यम तमोगुरगी हैं वे (हस्तिनः तुरंगा:) हाथी, घोड़ा, (शूद्रा: म्लेच्छा: निन्दिताः) शूद्र, म्लेच्छ, निन्दित कर्म करने हारे, (सिंहाः व्याघ्राः वराहाः) सिंह, व्याघ्र, वराह अर्थात् सुकर के जन्म को प्राप्त होते हैं॥४३॥(स० प्र० नवम समु०)