Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 42 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 42

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 42
Shloka
स्थावराः कृमिकीटाश्च मत्स्याः सर्पाः सकच्छपाः। पशवश्च मृगाश्चैव जघन्या तामसी गतिः॥

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1 Bhashyas
Subject
तीन गतियों के भेद
Meaning
(जघन्या तामसी) जो अत्यन्त तमोगुणी हैं वे (स्थावराः) स्थावर वृक्षादि (कृमिकीटाः मत्स्याः सर्पा: सकच्छपाः पशवः च मृगाः) कृमि, कीट, मत्स्यु, सर्प, . कच्छप, पशु और मृग के जन्म को प्राप्त होते हैं॥४२॥(स० प्र० नवम समु०)