Adhyay 12
Shloka 41
Shloka
त्रिविधा त्रिविधैषा तु विज्ञेया गौणिकी गतिः। अधमा मध्यमाग्र्या च कर्मविद्याविशेषतः॥
Shloka 41 Chapter Twelve
Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन