Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 41 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 41

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 41
Shloka
त्रिविधा त्रिविधैषा तु विज्ञेया गौणिकी गतिः। अधमा मध्यमाग्र्या च कर्मविद्याविशेषतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एषा त्रिविधा) ये तीन प्रकार की [ सत्त्व, रज, तम] गतियाँ (कर्म-विद्या विशेषतः) कर्म और विद्या की विशेषताओं के आधार पर प्रत्येक की पुनः (अधमा, मध्यमा च अग्रया) अधम, मध्यम औौर उत्तम भेद से (त्रिविधा गौरिणकी गतिः विज्ञेया) तीन-तीन प्रकार की गौण गतियाँ होती हैं [१२४२-. ५०]॥४१॥