Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 40 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 40

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 40
Shloka
देवत्वं सात्त्विका यान्ति मनुष्यत्वं च राजसाः। तिर्यक्त्वं तामसा नित्यं इत्येषा त्रिविधा गतिः॥

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1 Bhashyas
Subject
गुणों के आधार पर तीन गतियाँ
Meaning
(सात्त्विका: देवत्वम्) जो मनुष्य सात्त्विक हैं वे देव अर्थात् विद्वान्, (राजसा: मनुष्यत्वम्) जो रजोगुणी होते हैं वे मध्यम मनुष्य, (च) और (तामसाः तिर्यक्त्वम्) जो तमोगुणयुक्त होते हैं वे नीचगति को (यान्ति) प्राप्त करते हैं, (इति + एषा त्रिविधा गतिः) इस प्रकार यह त्रिविध गति है॥४०॥(स० प्र० नवम समु०)