Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 4 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 4

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 4
Shloka
तस्येह त्रिविधस्यापि त्र्यधिष्ठानस्य देहिनः। दशलक्षणयुक्तस्य मनो विद्यात्प्रवर्तकम्॥

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Meaning
(इह) इस विषय में (देहिनः मनः) मनुष्य के मन को (तस्य त्रिविधस्य + अपि त्रि + अधिष्ठानस्य दशलक्षणयुक्तस्य) उस उत्तम, मध्यम, अधम भेद से तीन प्रकार के मन, वचन, क्रिया भेद से तीन प्राश्रय वाले और दशलक्षरणों [१२ । ५-७] से युक्त कर्म का (प्रवर्तकं विद्यात्) प्रवृत्त करनेवाला जानो॥४॥