Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 39 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 39

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/39
Adhyay 12 Shloka 39
Shloka
येन यस्तु गुणेनैषां संसरान्प्रतिपद्यते। तान्समासेन वक्ष्यामि सर्वस्यास्य यथाक्रमम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
अब जिस-जिस गुण से, जिस-जिस गति को जीव प्राप्त होता है, उस उस का आगे लिखते हैं—। (स० प्र० नवम समु०) (एषाम्) इन तीनों गुणों में (येन गुणेन) जिस गुण से (य: तु) जो मनुष्य (संसारान् प्रतिपद्यते) जिस सांसारिक गति को प्राप्त करता है (तान्) उन. सबको (अस्य सर्वस्य यथाक्रमं समायेन वक्ष्यामि) समस्त संसार के क्रम से, संक्षेप से कहूँगा —॥३९॥