Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 37 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 37

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 37
Shloka
यत्सर्वेणेच्छति ज्ञातुं यन्न लज्जति चाचरन्। येन तुष्यति चात्मास्य तत्सत्त्वगुणलक्षणम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
और जब मनुष्य का आत्मा (सर्वेण ज्ञातुम + इच्छति) सव से जानने को चाहे, गुरण ग्रहण करता जाये, (यत् च आचरन् न लज्जति) अच्छे कामों में लज्जा न करे (च) और (ये आत्मा तुष्यति) जिस कर्म से आत्मा प्रसन्न होवे अर्थात् धर्माचरण ही में रुचि रहे (तत् सत्वगुणलक्षणम्) तब समझना कि मुझ में सत्त्वगुण प्रबल है॥३७॥(स० प्र० नवम समु०)