Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 36 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 36

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/36
Adhyay 12 Shloka 36
Shloka
येनास्मिन्कर्मना लोके ख्यातिं इच्छति पुष्कलाम्। न च शोचत्यसंपत्तौ तद्विज्ञेयं तु राजसम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(येन कर्मरणा) जिस कर्म से (अस्मिन् लोके) इस लोक में जीवात्मा (पुष्कलां ख्यातिम् + इच्छति) पुष्कल प्रसिद्धि चाहता, (असंपत्तौ न शोचति) दरिद्रता होने में भी चारण, भाट आदि को [ अपनी प्रसिद्धि के लिए] दान देना नहीं छोड़ता, (तत् विज्ञेयं तु राजसम्) तब समझना कि मुझ में रजोगुण प्रवल है ॥३६॥(स० प्र० नवम समु०)