Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 35 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 35

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 35
Shloka
यत्कर्म कृत्वा कुर्वंश्च करिष्यंश्चैव लज्जति। तज्ज्ञेयं विदुषा सर्वं तामसं गुणलक्षणम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यत् कर्म कृत्वा) जब अपना आत्मा जिस कर्म को करके, (कुर्वन्) करता हुआ (च) और (करिष्यन् + एव लज्जति) करने की इच्छा से लज्जा, शंका और भय को प्राप्त होवे (तत् ज्ञेयं सर्वं तामसं गुणलक्षणम्) तब जानो कि मुझ में प्रवृद्ध तमोगुण है॥३५॥(स० प्र० नवम समु०)