Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 33 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 33

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 33
Shloka
लोभः स्वप्नोऽधृतिः क्रौर्यं नास्तिक्यं भिन्नवृत्तिता। याचिष्णुता प्रमादश्च तामसं गुणलक्षणम्॥

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1 Bhashyas
Subject
तमोगुरण के लक्षण
Meaning
जब तमोगुण का उदय और दोनों का अन्तर्भाव होता है तव (लोभः) अत्यन्त लोभ अर्थात् सब पापों का मूल बढ़ता, (स्वप्नः) अत्यन्त आलस्य और निद्रा, (अधृतिः) धैर्य का नाश, (क्रौर्यम्) क्रूरता का होना, (नास्तिक्यम्) नास्तिक्य अर्थात् वेद और ईश्वर में श्रद्धा का न रहना, (भिन्नवृत्तिता) भिन्नभिन्न अन्तःकरण की वृत्ति (च) और (प्रमाद:) एकाग्रता का अभाव, (याचिष्णुता) और किन्हीं व्यसनों में फंसना होवे, तब (तामसं गुरगलक्षणम्) तमोगुण का लक्षण विद्वान् को जानने योग्य है ॥३३॥(स० प्र० नवम समु०)