Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 32 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 32

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 32
Shloka
आरम्भरुचिताधैर्यं असत्कार्यपरिग्रहः। विषयोपसेवा चाजस्रं राजसं गुणलक्षणम्॥

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Subject
रजोगुण के लक्षण
Meaning
जब रजोगुण का उदय, सत्त्वगुण और तमोगुण का अन्तर्भाव होता है तब (आरम्भ-रुचिता) आरम्भ में रुचिता, (अधैर्यम्) धैर्यत्याग, (सत्कार्यपरिग्रहः) असत् कर्मों का ग्रहण, (अजस्र विषय-उपसेवा) निरन्तर विषयों की सेवा में प्रीति होती है (राजसं गुणलक्षणम्) तभी समझना कि रजोगुण प्रधानता से मुझ में वत रहा है ॥३२॥(स० प्र० नवम समु०)