Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 28 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 28

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 28
Shloka
यत्तु दुःखसमायुक्तं अप्रीतिकरं आत्मनः। तद्रजो प्रतीपं विद्यात्सततं हारि देहिनाम्॥

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1 Bhashyas
Subject
रजोगुण की पहचान
Meaning
(यत् तु आत्मनः) जब आत्मा और मन (दुःखसमायुक्तम् + अप्रीतिकरम्) दुःखसंयुक्त प्रसन्नतारहित विषय में (सततं हारि) इधर-उधर गमन - आगमन में लगे (तत् विद्यात् रजः) तब समझना कि रजोगुण प्रधान, सत्त्वगुरण और तमोगुण प्रधान है ॥२८॥ (स० प्र० नवम समु०) (देहिनाम्) प्राणियों के......... (प्रतिपम) सतोगुरण का विरोधी............