Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 26 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 26

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 26
Shloka
सत्त्वं ज्ञानं तमोऽज्ञानं रागद्वेषौ रजः स्मृतम्। एतद्व्याप्तिमदेतेषां सर्वभूताश्रितं वपुः॥

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Meaning
(सत्त्वं ज्ञानम्) जव ग्रात्मा में ज्ञान हो तब सत्त्व, (अज्ञानं तमः) जब अज्ञान रहे तब तम, (रागद्वेषौ रजः स्मृतम) और जब राग-द्वेष में आत्मा लगे तब रजोगुण जानना चाहिए (एतेषां सर्वभूताश्रितं वपुः एतत् व्याप्तिमत्) ये तीन प्रकृति के गुण सब संसारस्थ पदार्थों में व्याप्त होकर रहते हैं॥२६॥(स० प्र० नवम समु०)